इंडो–लंका समझौता (1987)
पाठ्यक्रम: GS2 / अंतर्राष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- श्रीलंका की तमिल राजनीतिक पार्टियों ने भारत से आग्रह किया है कि वह इंडो–लंका समझौते के पूर्ण क्रियान्वयन हेतु दबाव बनाए रखे।
इंडो–लंका समझौता (1987)
- यह द्विपक्षीय समझौता जुलाई 1987 में राजीव गांधी और जे. आर. जयवर्धने के बीच श्रीलंका में जातीय संघर्ष को संबोधित करने के लिए किया गया था।
- उद्देश्य: सिंहली-बहुल सरकार और तमिल अल्पसंख्यकों के बीच लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष का समाधान।
- मुख्य प्रावधान:
- प्रांतों को अधिक क्षेत्रीय स्वायत्तता देने हेतु राजनीतिक शक्तियों का विकेंद्रीकरण।
- तमिल भाषा को सिंहली के साथ आधिकारिक दर्जा प्रदान करना।
श्रीलंकाई संविधान का 13वाँ संशोधन (1987)
- इंडो–लंका समझौते के प्रावधानों को लागू करने और विकेंद्रीकरण हेतु संवैधानिक ढाँचा प्रदान करने के लिए 1987 में पारित।
- मुख्य विशेषताएँ:
- सभी नौ प्रांतों में प्रांतीय परिषदों की स्थापना।
- शक्तियों का तीन-स्तरीय वितरण: प्रांतीय सूची, आरक्षित सूची और समवर्ती सूची (भारतीय संघीय ढाँचे के समान)।
- शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य और स्थानीय शासन जैसे विषयों का प्रांतीय स्तर पर हस्तांतरण।
स्रोत: TH
राष्ट्रीय चिकित आयोग (NMC)
पाठ्यक्रम: GS2 / शासन
संदर्भ
- राष्ट्रीय चिकित आयोग (NMC) ने रजिस्ट्रेशन ऑफ मेडिकल प्रैक्टिशनर्स एंड लाइसेंस टू प्रैक्टिस मेडिसिन (अमेंडमेंट), रेगुलेशन्स, 2026 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है, जिसका उद्देश्य चिकित्सा शिक्षा क्षमता का विस्तार करना और गुणवत्ता मानकों को सुदृढ़ करना है।
राष्ट्रीय चिकित आयोग (NMC) के बारे में
- NMC भारत की सर्वोच्च वैधानिक संस्था है, जो चिकित्सा शिक्षा, पेशेवरों और संस्थानों को विनियमित करती है।
- इसकी स्थापना 2020 में राष्ट्रीय चिकित आयोग अधिनियम, 2019 के अंतर्गत की गई थी, जिसने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) को प्रतिस्थापित किया।
- यह चार स्वायत्त बोर्डों के माध्यम से कार्य करता है:
- स्नातक चिकित्सा शिक्षा बोर्ड (UGMEB)
- स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा बोर्ड (PGMEB)
- चिकित्सा मूल्यांकन और रेटिंग बोर्ड (MARB)
- आचार और चिकित्सा पंजीकरण बोर्ड (EMRB)
- संरचना:
- एक अध्यक्ष
- 10 पदेन सदस्य (मंत्रालयों और संस्थानों के प्रतिनिधि सहित)
- 22 अंशकालिक सदस्य (राज्य प्रतिनिधि और विशेषज्ञ सहित)
स्रोत: TH
भारत: जामुन के विकास का केंद्र
पाठ्यक्रम: GS3 / कृषि
संदर्भ
- हाल ही में एक अध्ययन से पता चला है कि सिज़ीगियम(जामुन) की उत्पत्ति पहले से कहीं अधिक पुरानी है और भारत ने इसके विकास में केंद्रीय भूमिका निभाई है।
उत्पत्ति और विकास
- पहले माना जाता था कि सिज़ीगियम की उत्पत्ति ऑस्ट्रेलिया या दक्षिण–पूर्व एशिया तक सीमित है।
- भारत से प्राप्त जीवाश्म साक्ष्यों ने इस धारणा को चुनौती दी और अधिक पुरानी उत्पत्ति स्थापित की।
- हिमाचल प्रदेश की कसौली संरचना से प्राप्त प्रारंभिक मियोसीन (~20 मिलियन वर्ष पूर्व) के जीवाश्मों में सिज़ीजियम पैलियोसैलिसीफोलियम की 11 अच्छी तरह संरक्षित पत्तियाँ मिलीं, जो भारत में इसकी सतत उपस्थिति की पुष्टि करती हैं।
- अब इस वंश को पूर्व गोंडवाना (~80 मिलियन वर्ष पूर्व) से जोड़ा गया है।
- भारत प्रारंभिक विविधीकरण का प्रमुख केंद्र रहा, जहाँ से यह वंश बाद में दक्षिण–पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया में फैला।
जामुन के बारे में
- जामुन मिर्टेसी(Myrtaceae) कुल का पुष्पीय पौधों का वंश है।
- यह उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में व्यापक रूप से वितरित है तथा पारिस्थितिक एवं आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण प्रजातियाँ शामिल करता है।
- औषधीय गुण: आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा पद्धति में इसका विशेष महत्व है।
- जाम्बोलिन जैसे यौगिकों के कारण यह विशेष रूप से मधुमेह-रोधी गुणों के लिए जाना जाता है।
- वितरण: भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, मलेशिया और फिलीपींस में व्यापक रूप से पाया जाता है।
- पारिस्थितिक महत्व: सामाजिक वनीकरण कार्यक्रमों में इसका उपयोग होता है, क्योंकि यह वनीकरण और क्षतिग्रस्त भूमि की पुनः प्राप्ति में सहायक है।
स्रोत: PIB
फाटा मोर्गाना
पाठ्यक्रम: GS3 / विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
समाचार में
- हाल ही में सोशल मीडिया पर जहाज़ों के समुद्र की सतह से कई मीटर ऊपर तैरते हुए दिखाई देने वाले वीडियो वायरल हुए हैं, जिससे फाटा मोर्गाना के प्रति वैज्ञानिक रुचि पुनः जागृत हुई है।
फाटा मोर्गाना के बारे में
- फाटा मोर्गाना एक प्रकार का सुपीरियर मिराज (श्रेष्ठ मृगतृष्णा) है।
- यह एक प्रकाशीय घटना है जिसमें दूरस्थ वस्तु (जैसे जहाज़, तटरेखा या हिमखंड) से आने वाला प्रकाश विभिन्न तापमान वाली वायु परतों से होकर गुजरते समय मुड़ जाता है।
- परिणामस्वरूप वस्तु की छवि अपनी वास्तविक स्थिति से विस्थापित होकर सामान्यतः ऊँचाई पर दिखाई देती है।
- इसका नाम आर्थरियन पौराणिक कथाओं की जादूगरनी मॉर्गन ले फे से लिया गया है, जिनकी इतालवी लोककथाओं में समुद्र से उठते महल और नगरों का वर्णन मिलता है।
इसके पीछे का भौतिक विज्ञान
- प्रकाश का अपवर्तन: जब प्रकाश एक माध्यम से दूसरे भिन्न घनत्व वाले माध्यम में प्रवेश करता है तो वह अपवर्तित हो जाता है।
- गर्म, हल्की वायु (कम घनत्व) से ठंडी, सघन वायु (अधिक घनत्व) में प्रवेश करते समय प्रकाश सघन वायु की ओर मुड़ता है।
- तापमान उत्क्रमण :
- सामान्यतः ऊँचाई बढ़ने पर वायु का तापमान घटता है।
- लेकिन तापमान उत्क्रमण में ठंडी, सघन वायु की परत सीधे गर्म, हल्की वायु के नीचे होती है।
- यही व्यवस्था फाटा मोर्गाना बनने की आवश्यक वायुमंडलीय शर्त है।
- वायुमंडलीय डक्टिंग और क्षितिज से परे प्रसार:
- तापमान उत्क्रमण में दूरस्थ जहाज़ से आने वाला प्रकाश इस परत में प्रवेश करता है और लगातार नीचे की ओर मुड़ता है।
- यदि तापमान का अंतर पर्याप्त तीव्र हो, तो प्रकाश पृथ्वी की वक्रता के चारों ओर मुड़कर उस पर्यवेक्षक तक पहुँच सकता है जो जहाज़ के वास्तविक क्षितिज से परे स्थित है।
- सामान्य परिस्थितियों में 40 किलोमीटर दूर की वस्तु पूरी तरह क्षितिज के नीचे छिप जाती है।
स्रोत: IT
ओडिशा: समुद्री स्थानिक योजना लागू करने वाला प्रथम राज्य
पाठ्यक्रम: GS3 / पर्यावरण
संदर्भ
- ओडिशा सरकार ने हाल ही में राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केंद्र (केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत) के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं, ताकि राज्य में समुद्री स्थानिक योजना(MSP) लागू किया जा सके।
परिचय
- भारत में सतत महासागर योजना 2019 से भारत–नॉर्वे सहयोग के अंतर्गत चल रही है।
- प्रथम चरण में इसे पुदुचेरी और लक्षद्वीप में लागू किया गया।
- 550 किमी लंबी तटरेखा वाले ओडिशा ने दूसरे चरण में MSP लागू करने वाला देश का प्रथम राज्य बनने का गौरव प्राप्त किया।
समुद्री स्थानिक योजना (MSP) क्या है?
- MSP सतत और एकीकृत महासागर प्रबंधन का उपकरण है, जिसका उद्देश्य ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा देना तथा जलवायु लचीलापन को सुदृढ़ करना है।
- यह बंदरगाह, मत्स्य पालन, जलीय कृषि, पर्यटन और उद्योग जैसे क्षेत्रों में समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग को सक्षम बनाता है।
- योजना के अंतर्गत बेंथिक मैपिंग द्वारा जलमग्न पारिस्थितिक तंत्र का अध्ययन किया जाता है।
- लवणता और तापमान जैसे मानकों का विश्लेषण कर पर्यटन, मत्स्य पालन, सीग्रास, समुद्री शैवाल की खेती एवं अन्य आर्थिक गतिविधियों हेतु उपयुक्त क्षेत्र चिन्हित किए जाते हैं।
स्रोत: IE
लुम्पोंगदेंग द्वीप
पाठ्यक्रम: GS1 / भूगोल
संदर्भ
- संरक्षण समूहों के विरोध के बाद मेघालय सरकार ने लुम्पोंगदेंग द्वीप पर प्रस्तावित लक्ज़री रिसॉर्ट परियोजना को वापस ले लिया।
परिचय
- लुम्पोंगदेंग द्वीप उमियम झील में स्थित है।
- उमियम झील एक कृत्रिम जलाशय है, जिसका निर्माण 1960 के दशक की शुरुआत में उमियम नदी पर जलविद्युत परियोजना हेतु बाँध बनाकर किया गया था।
- यह द्वीप शिलांग से लगभग 20 किमी दूर है और शंकुधारी वनस्पति से युक्त है।
- द्वीप झील के मध्य के निकट स्थित है।
स्रोत: TH
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संक्षिप्त समाचार 21-04-2026